भीष्म पर्व  अध्याय ४१

युधिष्ठिर उवाच

जय़माशास्स्व मे व्रह्मन्मन्त्रय़स्व च मद्धितम् |  ५३   क
युध्यस्व कौरवस्यार्थे वर एष वृतो मय़ा ||  ५३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति