आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ४

वैशम्पाय़न उवाच

यदा तु कौरवो राजा पुत्रं सस्मार वालिशम् |  २   क
तदा भीमं हृदा राजन्नपध्याति स पार्थिवः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति