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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
तथैव भीमसेनोऽपि धृतराष्ट्रं जनाधिपम् |  ३   क
नामर्षय़त राजेन्द्र सदैवातुष्टवद्धृदा ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति