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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः कालपरीतास्ते वृष्ण्यन्धकमहारथाः |  १२   क
अपश्यन्नुद्धवं यान्तं तेजसावृत्य रोदसी ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति