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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
तच्चाग्निदत्तं कृष्णस्य वज्रनाभमय़स्मय़म् |  ३   क
दिवमाचक्रमे चक्रं वृष्णीनां पश्यतां तदा ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति