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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
तदभून्मुसलं घोरं वज्रकल्पमय़ोमय़म् |  ३५   क
जघान तेन कृष्णस्तान्येऽस्य प्रमुखतोऽभवन् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति