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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
पतङ्गा इव चाग्नौ ते न्यपतन्कुकुरान्धकाः |  ४१   क
नासीत्पलाय़ने वुद्धिर्वध्यमानस्य कस्यचित् ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति