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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
तं तु पश्यन्महावाहुर्जानन्कालस्य पर्ययम् |  ४२   क
मुसलं समवष्टभ्य तस्थौ स मधुसूदनः ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति