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सभा पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
कक्षीवानौशिजश्चैव नाचिकेतोऽथ गौतमः |  १५   क
पैङ्गो वराहः शुनकः शाण्डिल्यश्च महातपाः |  १५   ख
कर्करो वेणुजङ्घश्च कलापः कठ एव च ||  १५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति