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सभा पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
जटासुरो मद्रकान्तश्च राजा; कुन्तिः कुणिन्दश्च किरातराजः |  २१   क
तथाङ्गवङ्गौ सह पुण्ड्रकेण; पाण्ड्योड्रराजौ सह चान्ध्रकेण ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति