सभा पर्व  अध्याय ४

वैशम्पाय़न उवाच

केतुमान्वसुदानश्च वैदेहोऽथ कृतक्षणः |  २४   क
सुधर्मा चानिरुद्धश्च श्रुताय़ुश्च महावलः ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति