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सभा पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
अर्जुनं चापि संश्रित्य राजपुत्रा महावलाः |  २८   क
अशिक्षन्त धनुर्वेदं रौरवाजिनवाससः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति