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विराट पर्व
अध्याय ४
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धौम्य उवाच
यच्च भर्तानुय़ुञ्जीत तदेवाभ्यनुवर्तय़ेत् |  १७   क
प्रमादमवहेलां च कोपं च परिवर्जय़ेत् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति