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विराट पर्व
अध्याय ४
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धौम्य उवाच
हास्यवस्तुषु चाप्यस्य वर्तमानेषु केषुचित् |  २९   क
नातिगाढं प्रहृष्येत न चाप्युन्मत्तवद्धसेत् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति