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विराट पर्व
अध्याय ४
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धौम्य उवाच
राजानं राजपुत्रं वा संवर्तय़ति यः सदा |  ३२   क
अमात्यः पण्डितो भूत्वा स चिरं तिष्ठति श्रिय़म् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति