विराट पर्व  अध्याय ५९

वैशम्पाय़न उवाच

प्रगृह्य कार्मुकश्रेष्ठं जातरूपपरिष्कृतम् |  २   क
शरानादाय़ तीक्ष्णाग्रान्मर्मभेदप्रमाथिनः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति