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विराट पर्व
अध्याय ४
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धौम्य उवाच
यानं वस्त्रमलङ्कारं यच्चान्यत्सम्प्रय़च्छति |  ४३   क
तदेव धारय़ेन्नित्यमेवं प्रिय़तरो भवेत् ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति