उद्योग पर्व  अध्याय १३

शल्य उवाच

एवमुक्ता तु सा देवी नहुषेण पतिव्रता |  २   क
प्रावेपत भय़ोद्विग्ना प्रवाते कदली यथा ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति