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भीष्म पर्व
अध्याय ४
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व्यास उवाच
नैव शक्या समाधातुं संनिपाते महाचमूः |  २९   क
दीर्णा इत्येव दीर्यन्ते योधाः शूरतमा अपि |  २९   ख
भीतान्भग्नांश्च सम्प्रेक्ष्य भय़ं भूय़ो विवर्धते ||  २९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति