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भीष्म पर्व
अध्याय ४
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व्यास उवाच
न वैनतेय़ो गरुडः प्रशंसति महाजनम् |  ३४   क
दृष्ट्वा सुपर्णोपचितिं महतीमपि भारत ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति