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कर्ण पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
अक्षौहिणीर्दशैकां च निर्जित्य निशितैः शरैः |  १२   क
अर्जुनेन हतो राजन्महावीर्यो जय़द्रथः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति