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कर्ण पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
समः कर्णस्य समरे यः स कर्णस्य पश्यतः |  २४   क
वृषसेनो महातेजाः शीघ्रास्त्रः कृतनिश्चय़ः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति