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मौसल पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
ततोऽर्जुनः क्षिप्रमिहोपय़ातु; श्रुत्वा मृतान्यादवान्व्रह्मशापात् |  ३   क
इत्येवमुक्तः स यय़ौ रथेन; कुरूंस्तदा दारुको नष्टचेताः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति