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कर्ण पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
उच्यमानो महाराज वन्धुभिर्हितकाङ्क्षिभिः |  ५६   क
तदिदं समनुप्राप्तं व्यसनं त्वां महात्ययम् ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति