कर्ण पर्व  अध्याय ४

धृतराष्ट्र उवाच

आख्याता मामकास्तात निहता युधि पाण्डवैः |  ५८   क
निहतान्पाण्डवेय़ानां मामकैर्व्रूहि सञ्जय़ ||  ५८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति