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सभा पर्व
अध्याय १२
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वैशम्पाय़न उवाच
शीघ्रगेन रथेनाशु स दूतः प्राप्य यादवान् |  २९   क
द्वारकावासिनं कृष्णं द्वारवत्यां समासदत् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति