menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
निक्षिप्य मानं दर्पं च वासुदेवसहोदरा |  १९   क
कृष्णाय़ाः प्रेष्यवद्भूत्वा शुश्रूषां कुरुते सदा ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति