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शल्य पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः कर्णे हते राजन्धार्तराष्ट्रः सुय़ोधनः |  ४   क
भृशं शोकार्णवे मग्नो निराशः सर्वतोऽभवत् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति