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सभा पर्व
अध्याय २८
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्प्रेषय़ामास रत्नानि विविधानि च |  ५२   क
चन्दनागुरुमुख्यानि दिव्यान्याभरणानि च ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति