menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अरण्ये यो विमुञ्चेत सङ्ग्रामे वा तनुं नरः |  ३१   क
क्रतूनाहृत्य महतो महिमानं स गच्छति ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति