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विराट पर्व
अध्याय ६४
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उत्तर उवाच
अन्तर्धानं गतस्तात देवपुत्रः प्रतापवान् |  ३२   क
स तु श्वो वा परश्वो वा मन्ये प्रादुर्भविष्यति ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति