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शल्य पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
तव पुत्राः कृतोत्साहाः पर्यवर्तन्त ते ततः |  ५०   क
पर्यवस्थाप्य चात्मानमन्योन्येन पुनस्तदा |  ५०   ख
सर्वे राजन्न्यवर्तन्त क्षत्रिय़ाः कालचोदिताः ||  ५०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति