menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
राज्याद्विनिकृतोऽस्माभिः कथं सोऽस्मासु विश्वसेत् |  ७   क
अक्षद्यूते च नृपतिर्जितोऽस्माभिर्महाधनः |  ७   ख
स कथं मम वाक्यानि श्रद्दध्याद्भूय़ एव तु ||  ७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति