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शल्य पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
विललाप हि यत्कृष्णा सभामध्ये समेय़ुषी |  ९   क
न तन्मर्षय़ते कृष्णो न राज्यहरणं तथा ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति