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शान्ति पर्व
अध्याय २८५
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पराशर उवाच
कर्मतोऽन्यानि गोत्राणि समुत्पन्नानि पार्थिव |  १८   क
नामधेय़ानि तपसा तानि च ग्रहणं सताम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति