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विराट पर्व
अध्याय २१
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भीमसेन उवाच
सत्यं भ्रातॄंश्च धर्मं च पुरस्कृत्य व्रवीमि ते |  ३२   क
कीचकं निहनिष्यामि वृत्रं देवपतिर्यथा ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति