द्रोण पर्व  अध्याय ३४

अभिमन्युरु उवाच

अहमेतत्प्रवेक्ष्यामि द्रोणानीकं दुरासदम् |  २४   क
पतङ्ग इव सङ्क्रुद्धो ज्वलितं जातवेदसम् ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति