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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्तु दिवमास्थाय़ नक्षत्रपथमाविशत् |  ५६   क
अहमेव तदाद्राक्षं द्रोणस्य निधनं नृप ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति