उद्योग पर्व  अध्याय ५४

दुर्योधन उवाच

समग्रा पार्थिवी सेना पार्थमेकं धनञ्जय़म् |  ४४   क
कस्मादशक्ता निर्जेतुमिति हेतुर्न विद्यते ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति