वन पर्व  अध्याय ४०

वैशम्पाय़न उवाच

कैरातं वेषमास्थाय़ काञ्चनद्रुमसंनिभम् |  २   क
विभ्राजमानो वपुषा गिरिर्मेरुरिवापरः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति