वन पर्व  अध्याय ४०

वैशम्पाय़न उवाच

श्रीमद्धनुरुपादाय़ शरांश्चाशीविषोपमान् |  ३   क
निष्पपात महार्चिष्मान्दहन्कक्षमिवानलः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति