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द्रोण पर्व
अध्याय २४
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सञ्जय़ उवाच
यस्तु शूरतमो राजन्सेनय़ोरुभय़ोर्मतः |  ३२   क
तं पटच्चरहन्तारं लक्ष्मणः समवारय़त् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति