वन पर्व  अध्याय ४०

अर्जुन उवाच

प्रसादय़े त्वां भगवन्सर्वभूतनमस्कृत |  ५९   क
न मे स्यादपराधोऽय़ं महादेवातिसाहसात् ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति