विराट पर्व  अध्याय ४०

उत्तर उवाच

परमोऽनुग्रहो मेऽद्य यत्प्रतर्को न मे वृथा |  १४   क
न हीदृशाः क्लीवरूपा भवन्तीह नरोत्तमाः ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति