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शल्य पर्व
अध्याय ४९
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वैशम्पाय़न उवाच
लोकान्समुत्पतन्तं च शुभानेकान्तय़ाजिनाम् |  २९   क
ततोऽग्निहोत्रिणां लोकांस्तेभ्यश्चाप्युत्पपात ह ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति