भीष्म पर्व  अध्याय ४०

श्रीभगवानु उवाच

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु |  ६५   क
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रिय़ोऽसि मे ||  ६५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति