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विराट पर्व
अध्याय ६४
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वैशम्पाय़न उवाच
आचार्यपुत्रो यः शूरः सर्वशस्त्रभृतामपि |  १६   क
अश्वत्थामेति विख्यातः कथं तेन समागमः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति