कर्ण पर्व  अध्याय ४०

सञ्जय़ उवाच

प्रपक्षं स समासाद्य पार्थः काम्वोजरक्षितम् |  १००   क
प्रममाथ वलाद्वाणैर्दानवानिव वासवः ||  १००   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति