आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ९५

वैशम्पाय़न उवाच

पुरागस्त्यो महातेजा दीक्षां द्वादशवार्षिकीम् |  ५   क
प्रविवेश महाराज सर्वभूतहिते रतः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति