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कर्ण पर्व
अध्याय ४०
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सञ्जय़ उवाच
गजवाजिमनुष्यैश्च निपतद्भिः समन्ततः |  ५५   क
रथैश्चावगतैर्मार्गे पर्यस्तीर्यत मेदिनी ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति